RTO की अनदेखी, ट्रांसपोर्टरों की मनमानी
चंद्रपुर: चंद्रपुर शहर में खराब सड़कें होने के कारण नागरिकों को आवागमन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नागपुर रोड पर स्थिति और भी खराब है, जहां बड़े परिवहन वाहनों के रोड के किनारे खड़े रहने से दुर्घटनाओं की संभावना काफी बढ़ जाती है।इसी के चलते 15 मार्च को रात 1 बजे हाईटेक कॉलेज ऑफ फार्मेसी के सामने नागपुर से चंद्रपुर आ रही बस ने सड़क पर खड़े ट्रक को टक्कर मार दी। इस टक्कर में बस के कंडक्टर की मौत हो गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
दुर्घटना कैसे हुई!
राज्य परिवहन विभाग की बस क्रमांक एमएच 14 केए 8587 नागपुर से चंद्रपुर की ओर आ रही थी। इस समय बस ने सड़क पर खड़े चड्डा कंपनी के ट्रक क्रमांक एमएच 31 सीए 3171 को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया।बस चालक ने बताया कि राख के कारण उसे सड़क पर आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए वह अचानक एक खड़े ट्रक से टकरा गया।
हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इस हादसे में बस के कंडक्टर संदीप वनकर की मौके पर ही मौत हो गई। कुल 13 घायलों में से दो लोगों की हालत चिंताजनक है।
पडोली चौक अक्सर दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। यहां पर सड़क के किनारे खड़े ट्रकों के कारण यातायात बाधित होता है, जिससे हादसे हो रहे हैं। यहां नियमित रूप से दुर्घटनाएं हो रही हैं क्योंकि रात के समय इस सड़क पर धूल के कारण वाहन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।
खड़ी गाड़ियाँ और धूल बन रही दुर्घटना का कारण
दुर्घटना का छह प्रतिशत दुर्घटनाओं में विभिन्न हाइवे पर किनारे में या बीच में खड़ी गाड़ियां हैं। इन खड़ी गाड़ियों के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। परिवहन विभाग ने इन्हीं बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ कठोर निर्णय लेना चाहिए। नागरिकों का मानना है कि बड़े ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी रहने से यातायात व्यवस्था में दिक्कते होती है। विशेष रूप से धूल वाले क्षेत्र में, इन वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की संभावना काफी बढ़ जाती है।
ट्रांसपोर्टरों का सड़कों पर अनैतिक कब्जा
चंद्रपुर शहर और राजमार्ग में चड्डा और DNR ट्रांसपोर्ट धारकों ने मनमानी कब्जा कर रखा है। आरटीओ विभाग इस ओर आंखें मूंदे बैठा है। आरटीओ विभाग और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं होती, जिसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों को ऐसी दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवानी पड़ती है।
नियम है कि यदि कोई ट्रक सड़क पर खड़ा है तो उसे पेड़ की टहनी या रेडियम से ढकना होगा, लेकिन ट्रांसपोर्टरों और आरटीओ विभाग की मिलीभगत होने से उनको लगता है कि कोई उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता है। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले आरटीओ विभाग का 500 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में सुर्खियों में आया था।अगर ऐसा ही चलता रहा तो आरटीओ विभाग रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों से अपनी छवि कैसे बचा पाएगा।
इस संबंध में एसटी महामंडल ने पडोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराकर चड्डा ट्रांसपोर्ट के चालक राजन बनवारी यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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