◼️गणपति विसर्जन शोभायात्रा में मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने किया शरबत वाटप..*
◼️रैयतवारी कॉलरी मित्र परिवार का "जश्ने ईद मिलादुन्नबी" पर हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल...*
चंद्रपुर :- चंद्रपुर में एक बार फिर से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली है। 28 सितंबर को जहां गणेश विसर्जन का जुलूस यहां पर निकाला गया, वहीं इसी दिन मुस्लिम समाज का त्योहार ईद मिलादुन्नबी है और इस दिन विशाल जुलूस ए मोहम्मदी निकलता है, लेकिन हिंदू समाज के त्योहार को देखते हुए जिले से मुस्लिम समाज ने 28 की जगह पर 29 सितम्बर को जुलूस निकालने का फैसला किया था। लेकिन 28 सितंबर को रैयतवारी कॉलरी मित्र परिवार की ओर से "जश्ने ईद मिलादुन्नबी" की खुशी में "गणपति विसर्जन शोभयात्रा" में हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे को देखते हुए शरबत वितरण किया गया।
रैयतवारी कॉलरी मित्र परिवार के नौशाद अहमद सिद्दीकी शहर अध्यक्ष- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अल्पसंख्यक विभाग ने कहा कि एक तरफ़ देश में हिंसा और नफ़रत का माहौल उफ़ान पर है तो दूसरी तरफ़ गणेश चतुर्थी के अवसर पर देश के अनेक हिस्सों से साझा जश्न की ऐसी कहानियां सामने आई हैं जिसमें हिंदू-मुसलमानों ने साथ मिलकर त्योहार की ख़ुशी बांटी है।और देश को कौमी एकता का नायाब पैग़ाम दिया है।
जनहित खबरें से बात करते हुए सुल्तान अशरफ़ अली महासचिव महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस सोसल मीडिया ने कहा कि नफ़रत, हिंसा और निराशा के समय में आपसी मेलजोल की सदियों पुरानी विरासत को संजोना बेहद ज़रूरी है। मज़हबी एकता और सद्भाव भारतीय संविधान और धर्मनिरपेक्षता की नींव हैं। भाईचारे की इन नायाब कहानियों के ज़रिए हम नफ़रत के दौर में संघर्ष के हौसले और उम्मीद को ज़िन्दा रखना चाहते है।
हमारी देश के हर हिस्से से एकता की ख़ूबसूरत कहानियों को सहेजने की कोशिश है. ये कहानियां बताती हैं कि कैसे बिना भेदभाव मेलजोल के साथ रहना, मिल–बांटकर खाना, घर और कारोबार हर जगह एक–दूसरे की परवाह करना हिंदुस्तानी तहज़ीब की सीख है. ये उदाहरण साबित करते हैं कि सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल्स के भड़काऊ सियासी हथकंड़ों के बावजूद भारतीयों ने प्रेम और एकता को चुना है. आईए! हम साथ मिलकर भारत के रोज़मर्रा के जीवन की इन कहानियों के गवाह बनें और हिंदुस्तान की साझी तहज़ीब और धर्म निरपेक्ष मूल्यों की हिफ़ाज़त करें! नफ़रत और पूर्वाग्रह से लड़ने के सफ़र में हमारे साथी बनें!
कार्यक्रम में नौशाद अहमद सिद्दीकी, सुल्तान अशरफ़ अली,ताजुद्दीन शेख़, रिज़वानुल हसन,हैदर अली,अनवर अली शाह,वहीद शेख,शाहिद शेख,मोइनुद्दीन शेख,शहंशाह शेख,मोहम्मद गौस,सलमान चौधरी, शोहेब शेख,सगीर भाई,रहिस अहमद, इब्राहिम शेख,सलीम शेख,सब्बीर शेख,यूनुस भाई, रूस्तम शेख,दिलशाद सिद्दीकी, अख्तर सिद्दीकी, जैनुद्दीन भाई, इमरान,बिल्ला भाई, शाहनवाज़,साहिल व रैयतवारी कॉलरी मित्र परिवार के सभी लोगों की मौजूदगी और योगदान रहा।